तलबीना (Talbina) क्या है? एक शुरुआती मार्गदर्शिका
तलबीना का नाम आपने शायद किसी इस्लामी व्याख्यान, सोशल मीडिया पोस्ट या हेल्दी रेसिपी वीडियो में सुना होगा। कई लोग इसे “सुन्नत वाला सुपरफूड” कहकर प्रमोट करते हैं, तो कुछ इसे हर बीमारी की दवा की तरह पेश करते हैं। लेकिन असलियत क्या है? तलबीना आखिर है क्या, What is Talbina made of? और क्या यह सच में इतना फायदेमंद है?
इस विस्तृत गाइड में हम तलबीना को बिना अतिशयोक्ति, सिर्फ़ हकीकत और उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर समझेंगे—ताकि आप खुद तय कर सकें कि इसे अपनी डाइट में जगह देनी चाहिए या नहीं।
1. तलबीना क्या है? (बुनियादी समझ)
सबसे पहले सरल शब्दों में समझते हैं।
तलबीना (Talbina) दरअसल जौ (Barley) से बनी हल्की, पतली खिचड़ी या दलिया जैसी डिश है। इसे आमतौर पर:
- जौ का आटा या बारीक पिसा जौ
- दूध या पानी (या दोनों)
- शहद या कोई हल्की मिठास
को मिलाकर पकाया जाता है। तैयार होने के बाद इसका रूप कुछ-कुछ पतली खीर या दलिया जैसा होता है।
तलबीना को खास क्या बनाता है?
- सरल सामग्री – इसमें बस कुछ बेसिक चीजें लगती हैं जो लगभग हर घर में मिल जाती हैं।
- नरम और आसानी से पचने वाला – पेट पर हल्का, बीमार या कमजोर व्यक्तियों के लिए भी अक्सर उपयोगी माना जाता है।
- इस्लामी परंपरा से जुड़ाव – हदीसों में तलबीना को ग़म और बीमारी में दिल को सुकून देने वाला बताया गया है, जिससे इसे आध्यात्मिक महत्व भी मिलता है।
2. तलबीना का इतिहास और इस्लामी परंपरा
तलबीना का ज़िक्र सिर्फ़ मॉडर्न हेल्थ ब्लॉग्स में नहीं, बल्कि हदीस की किताबों में भी मिलता है।
नाम की उत्पत्ति
“तलबीना” शब्द अरबी के शब्द “लबन” (दूध या दही जैसी चीज) से लिया गया है।
- इसकी बनावट और रंग कुछ-कुछ दही जैसा लगता है, इसलिए इसे तलबीना कहा गया।
हदीसों में तलबीना
हज़रत आयशा (रज़ि.) से रिवायत है कि:
- वे दुखी या बीमार लोगों के लिए तलबीना बनाने को कहती थीं।
- उन्होंने बताया कि नबी ﷺ ने तलबीना को दिल की कमजोरी और ग़म को हल्का करने वाला बताया।
हदीसों का मजमून यह है कि:
- तलबीना भूखे पेट को पोषण देता है,
- दिल (मन) को कुछ सुकून देता है,
- और शरीर को कुछ ताकत पहुंचाता है।
हालाँकि, यह ज़रूरी है कि हम इसे अल्लाह की तरफ़ से दी गई एक नेमत और राहत का ज़रिया समझें, हर बीमारी की जादुई दवा नहीं।
3. तलबीना किससे बनता है? (सामग्री की सच्चाई)
3. अब सीधे मूल सवाल पर आते हैं – लोग अक्सर पूछते हैं:
“What is Talbina made of?”
सच तो यह है कि तलबीना की बेसिक रेसिपी बहुत ही सरल है। ज़्यादातर परंपरागत और सुन्नती तलबीना इन मुख्य चीज़ों से बनता है:
जौ (Barley)
- रूप: जौ का आटा, बारीक पिसा जौ, या जौ का दलिया
- जौ ही तलबीना की असली जान है।
- इसमें फाइबर, विटामिन और कई मिनरल मौजूद होते हैं।
- दूध या पानी
- कई लोग सिर्फ़ पानी से भी बनाते हैं।
- आमतौर पर दूध + पानी दोनों मिलाकर बनाना आम है, ताकि डिश हल्की भी रहे और पोषक भी।
- जिनको दूध से दिक्कत हो, वे पानी या प्लांट-बेस्ड मिल्क (जैसे बादाम दूध) ले सकते हैं।
शहद (या दूसरी हल्की मिठास)
- हदीसों में शहद का बहुत ज़िक्र है और उसे भी शिफा का ज़रिया बताया गया है।
- इसलिए परंपरागत तलबीना में शहद से मिठास दी जाती है।
- अगर किसी को शुगर की दिक्कत है, तो मात्रा बहुत कम रखी जाती है या वैकल्पिक विकल्प चुने जाते हैं।
वैकल्पिक सामग्री (टेस्ट और ज़रूरत के अनुसार)
- इलायची पाउडर
- दालचीनी
- थोड़े से मेवे (बादाम, पिस्ता – कटा हुआ)
- खजूर के छोटे टुकड़े
- किशमिश
इन अतिरिक्त चीज़ों का मकसद स्वाद बढ़ाना होता है। असली तलबीना का बेस हमेशा जौ + तरल (दूध/पानी) + हल्की मिठास ही रहेगा।
4. तलबीना बनाने की आसान विधि (Step‑by‑Step)
अब जब हमें पता चल गया कि तलबीना किन चीज़ों से बनता है, तो चलिए इसकी आसान रेसिपी देखते हैं। यह रेसिपी शुरुआती लोगों के लिए है, ताकि वे बिना कन्फ्यूज़ हुए पहली बार भी इसे आराम से बना सकें।
4.1 बेसिक तलबीना रेसिपी (पारंपरिक स्टाइल)
सामग्री (1–2 लोगों के लिए):
- जौ का आटा या बारीक पिसा जौ – 2 बड़े चम्मच
- दूध – 1 कप
- पानी – ½ से 1 कप (अपनी पसंद के अनुसार गाढ़ापन रखें)
- शहद – 1 से 2 छोटे चम्मच (स्वाद के अनुसार)
- चाहें तो – 1 चुटकी इलायची पाउडर
विधि:
जौ को घोलें
- सबसे पहले एक बर्तन या पैन में दूध और पानी मिला दें।
- अब इसमें जौ का आटा डालें।
- अच्छी तरह फेंटें ताकि गुठलियाँ न रहें।
धीमी आँच पर पकाएँ
- गैस पर बर्तन रखें और आँच धीमी से मीडियम रखें।
- लगातार चलाते रहें, वरना नीचे लग सकता है।
गाढ़ापन कंट्रोल करें
- जब मिश्रण थोड़ा गाढ़ा होने लगे, तो देखें कि आपको कैसा कंसिस्टेंसी चाहिए।
- तलबीना आमतौर पर पतला और बहने वाला रखा जाता है, न कि बहुत गाढ़ा दलिया जैसा।
मिठास और स्वाद
- गैस बंद करने से ठीक पहले इलायची पाउडर डालें (अगर इस्तेमाल कर रहे हों)।
- गैस बंद कर दें और थोड़ा ठंडा होने पर शहद मिलाएँ।
- ध्यान दें: बहुत गर्म में शहद डालने से उसका स्वाद और कुछ गुण कम हो सकते हैं, इसलिए हल्का गुनगुना होने पर मिलाना बेहतर है।
सर्व करें
- इसे कप या बाउल में डालें।
- बहुत गरम न पीएँ, हल्का गुनगुना या नरम गरम बेहतर रहता है।
4.2 दूध न पीने वालों के लिए (डेयरी‑फ्री तलबीना)
अगर आपको दूध से एलर्जी है या आप लैक्टोज इन्टॉलरेंट हैं, तो भी आप तलबीना ले सकते है
कैसे?
- दूध की जगह सिर्फ़ पानी या
- बादाम दूध / ओट मिल्क / नारियल दूध का उपयोग करें।
बाकी रेसिपी वही रहेगी। ध्यान यह रखें कि:
- प्लांट-बेस्ड मिल्क पहले से मीठा तो नहीं है, वरना शहद की मात्रा कम रखें।
4.3 वजन घटाने वालों के लिए हल्का तलबीना
जो लोग वज़न कंट्रोल या फैट लॉस पर काम कर रहे हैं, वे तलबीना को थोड़ा हल्का बना सकते हैं।
टिप्स:
- फुल-फैट दूध की जगह टोन्ड या स्किम्ड दूध लें।
- शहद बहुत कम मात्रा में या बिल्कुल न डालें, या सिर्फ़ स्वाद के लिए ½ चम्मच डालें।
- मेवे कम डालें या न डालें, क्योंकि इनमें कैलोरी ज़्यादा होती है।
इस तरह बना तलबीना:
- अच्छी फाइबर और कार्बोहाइड्रेट देता है,
- पेट को भरा हुआ महसूस कराता है,
- और कुल कैलोरी भी बहुत ज़्यादा नहीं होती।
4.4 बच्चों के लिए तलबीना
बच्चों को नया टेस्ट पसंद न आए तो आप:
- थोड़ा ज्यादा दूध और कम जौ डालकर इसे पतला और मिल्की बना सकते हैं।
- ऊपर से थोड़ा सा घिसा हुआ बादाम या सूखा मेवा डालकर गार्निश कर सकते हैं।
- हल्की इलायची या दालचीनी से खुशबू बढ़ा सकते हैं।
हालाँकि, 1 साल से छोटे बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए (शिशु-बोटुलिज़्म का रिस्क), इसलिए डॉक्टर से सलाह लेकर ही छोटे बच्चों में प्रयोग करें।
5. तलबीना में क्या पोषण मिलता है? (साइंस की नज़र से)
अब बात करते हैं तलबीना के पोषण की।
याद रखें: तलबीना की न्यूट्रिशन प्रोफाइल इस पर निर्भर करेगी कि:
- आपने कितना जौ लिया,
- दूध की जगह क्या इस्तेमाल किया,
- और मिठास किस चीज़ से व कितनी डाली।
फिर भी, जौ और दूध की वजह से इसमें आम तौर पर ये पोषक तत्व मिलते हैं:
5.1 जौ (Barley) के मुख्य पोषक तत्व
जौ में आम तौर पर पाया जाता है:
- फाइबर (विशेषकर β‑glucan) – यह घुलनशील फाइबर है, जो कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर पर अच्छा असर डाल सकता है (वैज्ञानिक अध्ययनों में जौ और बीटा-ग्लूकन पर काफी रिसर्च है)।
- कम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट – धीरे-धीरे ऊर्जा रिलीज़ करते हैं, जिससे लंबे समय तक तृप्ति रहती है।
- कुछ मात्रा में प्रोटीन
- बी-विटामिन्स (जैसे B1, B3 आदि) – एनर्जी मेटाबॉलिज़्म के लिए ज़रूरी
- मिनरल्स – आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, जिंक आदि की कुछ मात्रा
5.2 दूध (या प्लांट-बेस्ड मिल्क)
अगर आप गाय/भैंस का दूध लेते हैं, तो आम तौर पर:
- प्रोटीन (केसिन और व्हे) – मसल्स और टिशू रिपेयर के लिए
- कैल्शियम – हड्डियों और दाँतों के लिए
- विटामिन D (अगर फोर्टिफाइड दूध)
- थोड़ी मात्रा में फैट और लैक्टोज (दूध की शुगर)
प्लांट-बेस्ड मिल्क (जैसे बादाम दूध) में आम तौर पर कम प्रोटीन लेकिन अच्छा स्वाद और हल्की कैलोरी होती है, और कई बार वे भी फोर्टिफाइड होते हैं।
5.3 शहद
शहद में:
- प्राकृतिक शुगर (फ्रक्टोज, ग्लूकोज़)
- कुछ एंटीऑक्सीडेंट्स
- माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की बहुत कम मात्रा
ध्यान रहे:
- शहद की कैलोरी भी शुगर जैसी ही होती है, इसलिए ज्यादा मात्रा वज़न या शुगर के लिए ठीक नहीं।
6. तलबीना के संभावित फायदे (संतुलित और सच्चा नज़रिया)
अब आते हैं सबसे चर्चित हिस्से पर—तलबीना के फायदे।
बहुत से लोग सोशल मीडिया पर तलबीना को हर बीमारी का इलाज, कैंसर की दवा या चमत्कारिक “कुरानिक फूड” की तरह पेश करते हैं। यह न तो वैज्ञानिक रूप से सही है, न शरीअत की हकीकत के बिल्कुल मुताबिक, क्योंकि इस्लाम में भी इलाज के लिए वजहें (asbab) अपनाने और डॉक्टरी सलाह लेने पर ज़ोर दिया गया है।
फिर भी, जो चीज़ें हमें न्यूट्रिशन और रिसर्च के आधार पर पता हैं, उन्हें ईमानदारी से देखना ज़रूरी है।
6.1 पाचन और पेट के लिए सहारा
- जौ का फाइबर, ख़ास तौर पर β‑glucan, पाचन को सपोर्ट करता है।
- फाइबर कब्ज को कम करने में मदद कर सकता है (अगर पानी की मात्रा भी ठीक ली जाए)।
- तलबीना की नरम, तरल जैसी बनावट बीमार या कमजोर व्यक्ति के लिए खाना आसान बनाती है।
6.2 तृप्ति और वज़न प्रबंधन
- जौ के कम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और फाइबर पेट को भरा हुआ महसूस करवाते हैं।
- अगर आप इसे नाश्ते में लेते हैं, तो कई लोगों में यह ज़्यादा देर तक भूख नहीं लगने देता, जिससे ओवरईटिंग कम हो सकती है।
- फिर भी, अगर इसमें बहुत ज़्यादा शहद, मेवे और फुल-फैट दूध मिलाएँगे तो कैलोरी भी बढ़ जाएगी, इसलिए संतुलन ज़रूरी है।
6.3 कोलेस्ट्रॉल पर संभावित असर
वैज्ञानिक रिसर्च में जौ और β‑glucan पर किए गए अध्ययनों से:
- यह पाया गया है कि घुलनशील फाइबर (soluble fiber) कुछ लोगों में LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) को कम करने में मदद कर सकता है।
- तलबीना, जौ-आधारित होने के कारण, इस फाइबर का सोर्स है।
हालाँकि:
- यह असर सभी में बराबर नहीं होता,
- और यह तभी मायने रखता है जब आपकी बाकी डाइट और लाइफस्टाइल भी स्वस्थ हो।
6.4 ब्लड शुगर कंट्रोल में सहयोग
- जौ, गेहूँ की तुलना में, ब्लड शुगर को अपेक्षाकृत धीमे बढ़ा सकता है (क्योंकि इसमें फाइबर ज़्यादा और ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम होता है)।
- अगर तलबीना बिना ज़्यादा मिठास के लिया जाए, तो यह कुछ लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।
लेकिन, डायबिटीज़ वाले व्यक्तियों को:
- शहद और दूध की मात्रा डॉक्टर या डाइटिशियन से पूछकर तय करनी चाहिए,
- ब्लड शुगर मॉनिटर करना चाहिए,
- और इसे दवाओं के विकल्प के रूप में कभी न लें।
6.5 मन को सुकून (Comfort Food Factor)
हदीसों में तलबीना को ग़म और उदासी में दिल को सुकून देने वाला बताया गया है। इसे दो तरह से समझ सकते हैं:
पोषण और ऊर्जा:
- जब आप बीमार या भावनात्मक रूप से कमजोर हों, तो सही पोषण मिलना ही शरीर और दिमाग को थोड़ा मजबूत बनाता है।
रूटीन, देखभाल और आध्यात्मिक कनेक्शन:
- किसी प्रियजन का तलबीना बनाकर खिलाना, प्यार और देखभाल महसूस कराता है।
- सुन्नत के तौर पर इसे लेना, एक मुसलमान के लिए इबादत की नीयत का सुकून भी दे सकता है।
यह “दिल का सुकून” केवल केमिकल या न्यूट्रिशन से नहीं, बल्कि इमोशनल और स्पिरिचुअल फैक्टर्स से भी आता है, जिसे साइंस पूरी तरह माप नहीं पाता, लेकिन हम इंसान महसूस करते हैं।
7. किसके लिए फ़ायदेमंद, किसके लिए सावधानी?
हर फूड की तरह तलबीना भी सभी के लिए एक जैसा नहीं होता। इसलिए, समझदारी से देखें कि यह आपके लिए कितना उपयुक्त है।
7.1 किन लोगों के लिए आम तौर पर अच्छा विकल्प हो सकता है?
- हल्का नाश्ता चाहने वाले – सुबह के नाश्ते के तौर पर
- बुज़ुर्ग – जिन्हें भारी खाना पचाने में दिक्कत हो
- बीमार/रिकवर कर रहे लोग – जिनके लिए सॉलिड फूड खाना मुश्किल हो
- हल्के वजन घटाने वाले प्लान पर रहने वाले – अगर यह संतुलित कैलोरी के साथ बनाया जाए
फिर भी, हर व्यक्ति की सेहत और जरूरत अलग होती है, इसलिए खास मेडिकल कंडीशन वाले लोग अपने डॉक्टर से बात करें।
7.2 किन्हें सावधान रहना चाहिए?
सीलिएक डिजीज या ग्लूटेन इन्टॉलरेंस वाले लोग
- जौ में ग्लूटेन होता है।
- ऐसे लोगों के लिए तलबीना सुरक्षित नहीं है, क्योंकि यह गंभीर रिएक्शन करा सकता है।
दूध से एलर्जी या लैक्टोज इन्टॉलरेंस वाले
- गाय/भैंस के दूध की जगह प्लांट-बेस्ड मिल्क या सिर्फ़ पानी इस्तेमाल करें।
- अगर दूध से सांस, त्वचा या पेट में गंभीर समस्या होती है, तो डॉक्टर की कड़ी निगरानी में ही कोई एक्सपेरिमेंट करें।
डायबिटीज़ मरीज
- शहद, दूध और जौ – तीनों ही कार्बोहाइड्रेट के सोर्स हैं।
- इसलिए तलबीना की मात्रा और टाइमिंग, दोनों डॉक्टर/डाइटिशियन से कंसल्ट करके रखें।
- यह शुगर-फ्री डिश नहीं है, बस तुलनात्मक रूप से बेहतर ऑप्शन हो सकता है।
किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियाँ
- कुछ किडनी पेशेंट्स को प्रोटीन, पोटैशियम या फॉस्फोरस लिमिट करना होता है।
- दूध और जौ दोनों में ये एलिमेंट्स मौजूद होते हैं, इसलिए डॉक्टर की सलाह बेहद ज़रूरी है।
8. तलबीना से जुड़े आम सवाल और भ्रांतियाँ
न हदीसों में, न ही किसी भरोसेमंद इस्लामी स्रोत में तलबीना को हर बीमारी की दवा नहीं बताया गया।
- इसे ग़म, उदासी और कमजोरी में दिल और शरीर के लिए सहारा बताया गया है।
8.1 क्या तलबीना हर बीमारी की दवा है?
नहीं।
- न हदीसों में, न ही किसी भरोसेमंद इस्लामी स्रोत में तलबीना को हर बीमारी की दवा नहीं बताया गया।
- इसे ग़म, उदासी और कमजोरी में दिल और शरीर के लिए सहारा बताया गया है।
इसलिए:
- तलबीना एक पोषण से भरपूर, सुन्नत से जुड़ी डिश है;
- मगर डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं है।
8.2 क्या तलबीना से वज़न ज़रूर घटता है?
तलबीना खुद-ब-खुद वज़न घटाने वाली कोई जादुई चीज़ नहीं है।
- अगर आप इसे ज़्यादा शहद, मेवे और फुल-फैट दूध के साथ ज्यादा मात्रा में खाएँगे, तो कैलोरी हाई हो जाएगी।
- अगर आप इसे नियंत्रित मात्रा में, कम मिठास के साथ, संतुलित डाइट और एक्सरसाइज़ के साथ लेते हैं, तो यह वज़न मैनेजमेंट में मददगार हो सकती है।
तो, तलबीना एक टूल हो सकता है, गारंटी नहीं।
8.3 क्या पैकेट वाला “रेडी‑मेड तलबीना मिक्स” भी उतना ही अच्छा है?
मार्केट में कई ब्रांड “तलबीना मिक्स” के नाम से प्रॉडक्ट बेचते हैं।
- कुछ में सिर्फ़ जौ होता है, जो अच्छा है;
- लेकिन कई में ज़्यादा चीनी, फ्लेवर, प्रिज़र्वेटिव और अनजान ऐडिटिव भी हो सकते हैं।
इसलिए:
- इंग्रीडिएंट लिस्ट ध्यान से पढ़ें।
- कोशिश करें कि बिना ज़रूरी केमिकल्स और ज़्यादा शुगर वाला मिक्स न लें।
- संभव हो तो घर पर खुद जौ पीसकर या भरोसेमंद जौ का आटा लेकर तलबीना बनाएँ।
8.4 क्या गर्भवती महिलाएँ तलबीना ले सकती हैं?
अधिकांश मामलों में, अगर:
- उन्हें जौ या दूध से एलर्जी नहीं है,
- और डॉक्टर ने कार्बोहाइड्रेट की सामान्य मात्रा की इजाज़त दी है,
तो हल्का, संतुलित तलबीना लेना सुरक्षित माना जा सकता है।
फिर भी, क्योंकि प्रेग्नेंसी में हर व्यक्ति की मेडिकल कंडीशन अलग हो सकती है:
- अपनी गायनेकोलॉजिस्ट या न्यूट्रिशनिस्ट से एक बार ज़रूर सलाह लें।
8.5 तलबीना दिन में कब लेना बेहतर है?
कोई सख़्त नियम नहीं। फिर भी, प्रैक्टिकल रूप से:
- सुबह का नाश्ता – दिन की शुरुआत के लिए हल्की, एनर्जेटिक डिश
- या शाम को हल्की भूख में – चाय/कॉफी के बजाय एक हेल्दी विकल्प
रात को बहुत देर से भारी मात्रा में लेना, खासकर अगर इसमें दूध और मीठा ज्यादा हो, तो कुछ लोगों में गैस या भारीपन कर सकता है। अपने शरीर के रिस्पॉन्स के अनुसार टाइमिंग तय करें।
9. तलबीना: कैसे करें समझदारी से उपयोग? (निष्कर्ष)
अब तक आपने जाना:
- तलबीना क्या है,
- What is Talbina made of?
- इसे कैसे बनाया जाता है,
- इसमें क्या पोषण है,
- इसके संभावित फायदे क्या हैं,
- और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
संक्षेप में:
- तलबीना एक पारंपरिक, इस्लामी परंपरा से जुड़ी, जौ-आधारित नरम डिश है, जो शरीर और मन, दोनों के लिए सहारा बन सकती है।
- यह न्यूट्रिशन से भरपूर है – खासकर फाइबर, कुछ विटामिन और मिनरल्स की वजह से।
- यह बीमार, बुज़ुर्ग, या भावनात्मक रूप से कमजोर लोगों के लिए पोषण और सुकून का एक अच्छा स्रोत हो सकता है।
- लेकिन यह किसी भी बीमारी की गारंटीड दवा नहीं है, न ही डॉक्टर की दवा या इलाज का विकल्प है।
- तलबीना का सबसे अच्छा इस्तेमाल यह है कि.आप इसे सुन्नत की नीयत से,संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में,अपनी सेहत और मेडिकल कंडीशन को ध्यान में रखते हुए,समय-समय पर अपनी डाइट में शामिल करें।
आख़िर में, हर खाने की चीज की तरह तलबीना भी तभी फायदेमंद बनेगा, जब:
- आपकी पूरी डाइट संतुलित हो,
- आप नियमित हल्की‑फुलकी शारीरिक गतिविधि (एक्सरसाइज़/वॉक) करें,
- और मानसिक तनाव को भी सही तरीकों से मैनेज करने की कोशिश करें।
अगर आप तलबीना को आज़माना चाहते हैं, तो सबसे पहले बेसिक रेसिपी से शुरुआत करें,
फिर अपने स्वाद और ज़रूरत के हिसाब से दूध, पानी, मिठास और मसालों की मात्रा एडजस्ट करें।
धीरे‑धीरे आपका शरीर और स्वाद खुद आपको बता देगा कि आपके लिए कौन‑सा तलबीना वर्ज़न सबसे बेहतर है।